बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं। कहहु तूल केहि लेखे माहीं।।
मूल पाठ
जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं। कहहु तूल केहि लेखे माहीं।।
समुझत अमित राम प्रभुताई। करत कथा मन अति कदराई।।
स्रोत अभिलेख 1.12 · पुस्तक पृ. 33, 33
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिस हवासे सुमेरु-जैसे पहाड़ उड़ जाते हैं, कहिये तो, उसके सामने रूई किस गिनतीमें है। श्रीरामजीकी असीम प्रभुताको समझकर कथा रचनेमें मेरा मन बहुत हिचकता है—॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 33 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं। कहहु तूल केहि लेखे माहीं।।
English explanation
When a wind can carry away Mount Meru, tell me, what does a tuft of cotton count for before it?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिससे; जिस | by which; that which |
| मारुत | वायु | wind |
| गिरि | पर्वत | mountain |
| मेरु | मेरु पर्वत | Meru, the cosmic mountain |
| उड़ाहीं | उड़ जाता है | is blown away |
| कहहु | कहो | tell me |
| तूल | रूई | cotton |
| केहि | किस | what |
| लेखे | गिनती; महत्त्व | reckoning; significance |
| माहीं | में | in |
2 समुझत अमित राम प्रभुताई। करत कथा मन अति कदराई।।
English explanation
Recognizing Rama's immeasurable greatness, my mind becomes very apprehensive when recounting his story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझत | समझते हुए | recognizing; understanding |
| अमित | असीम | immeasurable |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| प्रभुताई | प्रभुता; महान सामर्थ्य | sovereign greatness; power |
| करत | कहते समय | while recounting |
| कथा | कथा | story |
| मन | मन | mind |
| अति | बहुत | very |
| कदराई | घबराता है; डरता है | grows apprehensive; fears |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 33
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 33, 33
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