बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कबि न होउँ नहिं चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम गुन गावउँ।।
मूल पाठ
कबि न होउँ नहिं चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम गुन गावउँ।।
कहँ रघुपति के चरित अपारा। कहँ मति मोरि निरत संसारा।।
स्रोत अभिलेख 1.12 · पुस्तक पृ. 33, 33
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं न तो कवि हूँ, न चतुर कहलाता हूँ; अपनी बुद्धिके अनुसार श्रीरामजीके गुण गाता हूँ। कहाँ तो श्रीरघुनाथजीके अपार चरित्र, कहाँ संसारमें आसक्त मेरी बुद्धि!॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 33 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कबि न होउँ नहिं चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम गुन गावउँ।।
English explanation
I am no poet, nor do I claim to be clever; I sing Rama's virtues according to my understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबि | कवि | poet |
| न | नहीं | not |
| होउँ | मैं हूँ | I am |
| नहिं | नहीं | not |
| चतुर | चतुर; निपुण | clever; skilled |
| कहावउँ | अपने को कहलाता हूँ | have myself called |
| मति | अपनी बुद्धि के | my understanding |
| अनुरूप | अनुसार | in accordance with |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| गुन | गुण | virtues |
| गावउँ | मैं गाता हूँ | I sing |
2 कहँ रघुपति के चरित अपारा। कहँ मति मोरि निरत संसारा।।
English explanation
What comparison is there between Rama's boundless deeds and my mind absorbed in worldly affairs!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहँ | कहाँ | where; how incomparable |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu dynasty |
| के | के | of |
| चरित | चरित्र; कार्य | deeds; life |
| अपारा | असीम | boundless |
| कहँ | कहाँ | where; how incomparable |
| मति | बुद्धि | mind; understanding |
| मोरि | मेरी | my |
| निरत | लगी हुई; लीन | absorbed; engrossed |
| संसारा | संसार में | in worldly affairs |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 33
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 33, 33
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।