बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहिं बर बाजि रामु असवारा। तेहि सारदउ न बरनै पारा।।
मूल पाठ
जेहिं बर बाजि रामु असवारा। तेहि सारदउ न बरनै पारा।।
संकरु राम रूप अनुरागे। नयन पंचदस अति प्रिय लागे।।
स्रोत अभिलेख 1.317 · पुस्तक पृ. 297, 298
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिस श्रेष्ठ घोड़ेपर श्रीरामचन्द्रजी सवार हैं, उसका वर्णन सरस्वतीजी भी नहीं कर सकतीं। शङ्करजी श्रीरामचन्द्रजीके रूपमें ऐसे अनुरक्त हुए कि उन्हें अपने पंद्रह नेत्र इस समय बहुत ही प्यारे लगने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 297 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जेहिं बर बाजि रामु असवारा। तेहि सारदउ न बरनै पारा।।
English explanation
Even Saraswati cannot fully describe the splendid horse on which Rama rode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिस पर | on which |
| बर | श्रेष्ठ | splendid |
| बाजि | घोड़े | horse |
| रामु | राम | Rama |
| असवारा | सवार थे | was mounted |
| तेहि | उसका | of that horse |
| सारदउ | सरस्वती भी | even Saraswati, goddess of speech |
| न | नहीं | not |
| बरनै | वर्णन कर | describe |
| पारा | सकतीं | can |
2 संकरु राम रूप अनुरागे। नयन पंचदस अति प्रिय लागे।।
English explanation
Shiva became enamored of Rama’s beauty and found his fifteen eyes exceedingly dear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संकरु | शंकर, शिव | Shiva |
| राम | राम के | Rama’s |
| रूप | रूप पर | beauty |
| अनुरागे | अनुरक्त हो गए | became enamored |
| नयन | नेत्र | eyes |
| पंचदस | पंद्रह | fifteen |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| लागे | लगे | seemed to him |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.317
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 297
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 297, 298
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।