बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेंहि समाज बैंठे मुनि जाई। हृदयँ रूप अहमिति अधिकाई।।
मूल पाठ
जेंहि समाज बैंठे मुनि जाई। हृदयँ रूप अहमिति अधिकाई।।
तहँ बैठ महेस गन दोऊ। बिप्रबेष गति लखइ न कोऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.134 · पुस्तक पृ. 143, 144
भावार्थ
मूल पाठ के बादनारदजी अपने हृदयमें रूपका बड़ा अभिमान लेकर जिस समाज (पंक्ति) में जाकर बैठे थे, ये शिवजीके दोनों गण भी वहीं बैठ गये। ब्राह्मणके वेषमें होनेके कारण उनकी इस चालको कोई न जान सका॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 143 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जेंहि समाज बैंठे मुनि जाई। हृदयँ रूप अहमिति अधिकाई।।
English explanation
The sage went and sat in an assembly, his heart filled with great pride in his appearance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेंहि | जिस | in which |
| समाज | सभा में | assembly |
| बैंठे | बैठे | sat |
| मुनि | नारद मुनि | the sage Narada |
| जाई | जाकर | having gone |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| रूप | अपने सौंदर्य का | in his own beauty |
| अहमिति | अभिमान | pride in himself |
| अधिकाई | बहुत अधिक | very great |
2 तहँ बैठ महेस गन दोऊ। बिप्रबेष गति लखइ न कोऊ।।
English explanation
The two attendants of Shiva sat there too. Disguised as Brahmins, their true identity was unknown to everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| बैठ | बैठे थे | sat |
| महेस | महेश अर्थात शिव के | of Shiva |
| गन | गण; अनुचर | attendants |
| दोऊ | दोनों | both |
| बिप्रबेष | ब्राह्मण के वेश में | in Brahmin disguise |
| गति | वास्तविक पहचान | true identity |
| लखइ | पहचानता था | recognized |
| न | नहीं | not |
| कोऊ | कोई | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.134
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 143
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 143, 144
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