बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जुथ जूथ मिलि चलीं सुआसिनि। निज छबि निदरहिं मदन बिलासनि।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसुहागिनी स्त्रियाँ झुंड-की-झुंड मिलकर चलीं, जो अपनी छबिसे कामदेवकी स्त्री रतिका भी निरादर कर रही हैं। सभी सुन्दर मङ्गलद्रव्य एवं आरती सजाये हुए गा रही हैं, मानो सरस्वतीजी ही बहुत-से वेष धारण किये गा रही हों॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 327 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जुथ जूथ मिलि चलीं सुआसिनि। निज छबि निदरहिं मदन बिलासनि।।
सकल सुमंगल सजें आरती। गावहिं जनु बहु बेष भारती।।
स्रोत अभिलेख 1.345 · पुस्तक पृ. 327, 328
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जुथ जूथ मिलि चलीं सुआसिनि। निज छबि निदरहिं मदन बिलासनि।।
English explanation
Married women gathered and set out in groups; their own beauty put even the god of love’s graceful women to shame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जुथ | समूह | group |
| जूथ | समूह | group |
| मिलि | मिलकर | having gathered |
| चलीं | चलीं | set out |
| सुआसिनि | सुहागिन स्त्रियाँ | women whose husbands were living |
| निज | अपनी | their own |
| छबि | सुंदरता से | with beauty |
| निदरहिं | फीका कर देती हैं; तिरस्कृत करती हैं | put to shame; outshine |
| मदन | कामदेव की | the god of love’s |
| बिलासनि | विलासिनी स्त्रियों को | graceful women of pleasure |
2 सकल सुमंगल सजें आरती। गावहिं जनु बहु बेष भारती।।
English explanation
They prepared the ceremonial lamps with every auspicious requisite and sang as though Saraswati herself were singing in many forms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| सुमंगल | शुभ सामग्रियाँ | auspicious requisites |
| सजें | सजाकर; सजाए हुए | having arranged; prepared |
| आरती | आरती की दीप-सामग्री | the ceremonial lamp offering |
| गावहिं | गाती हैं | sing |
| जनु | मानो | as though |
| बहु | अनेक | many |
| बेष | रूपों में | in forms |
| भारती | वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.345
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 327
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 327, 328
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।