बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिनका नाम लेते ही जगत्में सारे अमङ्गलोंकी जड़ कट जाती है और चारों पदार्थ (अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष) मुट्ठीमें आ जाते हैं, ये वही [जगत्के माता-पिता] श्रीसीतारामजी हैं; कामके शत्रु शिवजीने ऐसा कहा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 295 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं।।
करतल होहिं पदारथ चारी। तेइ सिय रामु कहेउ कामारी।।
स्रोत अभिलेख 1.315 · पुस्तक पृ. 295, 296
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं।।
English explanation
AI draft: By taking their name, all inauspiciousness in the world is destroyed at its root.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिनका | whose |
| कर | का | of |
| नामु | नाम | name |
| लेत | लेने पर | upon uttering |
| जग | जगत | the world |
| माहीं | में | in |
| सकल | समस्त | all |
| अमंगल | अशुभ और अनिष्ट | inauspiciousness and misfortune |
| मूल | जड़ से | at the root |
| नसाहीं | नष्ट हो जाते हैं | are destroyed |
2 करतल होहिं पदारथ चारी। तेइ सिय रामु कहेउ कामारी।।
English explanation
And the four goals of human life come within one's grasp—Shiva, the foe of the god of desire, said that these are those very Sita and Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करतल | हथेली पर; सहज उपलब्ध | in one's palm; readily attainable |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| पदारथ | पुरुषार्थ; जीवन के लक्ष्य | goals of human life |
| चारी | चार | four |
| तेइ | वे ही | those very |
| सिय | सीता | Sita, Rama's consort |
| रामु | राम | Rama |
| कहेउ | कहा | said |
| कामारी | कामदेव के शत्रु शिव | Shiva, foe of the god of desire |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.315
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 295
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 295, 296
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।