बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानि नृपहि आपन आधीना। बोला तापस कपट प्रबीना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजाको अपने अधीन जानकर कपटमें प्रवीण तपस्वी बोला—हे राजन्! सुनो, मैं तुमसे सत्य कहता हूँ, जगत्में मुझे कुछ भी दुर्लभ नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 171 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जानि नृपहि आपन आधीना। बोला तापस कपट प्रबीना।।
सत्य कहउँ भूपति सुनु तोही। जग नाहिन दुर्लभ कछु मोही।।
स्रोत अभिलेख 1.168 · पुस्तक पृ. 171, 172
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जानि नृपहि आपन आधीना। बोला तापस कपट प्रबीना।।
English explanation
Knowing the king to be under his control, the ascetic skilled in deceit spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | knowing |
| नृपहि | राजा को | the king |
| आपन | अपने | his own |
| आधीना | अधीन | under control |
| बोला | बोला | spoke |
| तापस | तपस्वी | the ascetic |
| कपट | छल-कपट में | in deceit |
| प्रबीना | निपुण | skilled |
2 सत्य कहउँ भूपति सुनु तोही। जग नाहिन दुर्लभ कछु मोही।।
English explanation
Listen, O king, I tell you truly: nothing in the world is difficult for me to obtain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्य | सच | the truth |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| भूपति | हे राजा | O king |
| सुनु | सुनो | listen |
| तोही | तुमसे | to you |
| जग | संसार में | in the world |
| नाहिन | नहीं है | is not |
| दुर्लभ | दुर्लभ; कठिनाई से मिलने वाला | hard to obtain |
| कछु | कुछ भी | anything |
| मोही | मेरे लिए | for me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.168
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 171
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 171, 172
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।