बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमुझको अपना दास जानकर कृपाकी खान आप सब लोग मिलकर छल छोड़कर कृपा कीजिये। मुझे अपने बुद्धि-बलका भरोसा नहीं है, इसीलिये मैं सबसे विनती करता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 28 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू।।
निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाही।।
स्रोत अभिलेख 1.8 · पुस्तक पृ. 28, 29
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू।।
English explanation
O sources of compassion, regard me too as your servant; all together, set aside deceit and show me affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | regarding |
| कृपाकर | हे कृपा के स्रोत | O sources of compassion |
| किंकर | सेवक | servant |
| मोहू | मुझे भी | me too |
| सब | आप सब | all of you |
| मिलि | मिलकर | together |
| करहु | करें | please show |
| छाड़ि | छोड़कर | setting aside |
| छल | छल | deceit |
| छोहू | स्नेह | affection |
2 निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाही।।
English explanation
I have no confidence in the strength of my own intellect; therefore I make a humble appeal to everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी | my own |
| बुधि | बुद्धि | intellect |
| बल | शक्ति | strength |
| भरोस | भरोसा | confidence |
| मोहि | मुझे | to me |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| तातें | इसलिए | therefore |
| बिनय | विनम्र निवेदन | a humble appeal |
| करउँ | मैं करता हूँ | I make |
| सब | सबके | everyone |
| पाही | पास; समक्ष | to; before |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 28
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 28, 29
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।