बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करन चहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा।।
मूल पाठ
करन चहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा।।
सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.8 · पुस्तक पृ. 28, 29
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं श्रीरघुनाथजीके गुणोंका वर्णन करना चाहता हूँ, परन्तु मेरी बुद्धि छोटी है और श्रीरामजीका चरित्र अथाह है। इसके लिये मुझे उपायका एक भी अंग अर्थात् कुछ (लेशमात्र) भी उपाय नहीं सूझता। मेरे मन और बुद्धि कंगाल हैं, किन्तु मनोरथ राजा है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 28 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करन चहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा।।
English explanation
I wish to sing Rama’s virtues, but my understanding is small and his deeds are unfathomably deep.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करन | करना | to do |
| चहउँ | मैं चाहता हूँ | I wish |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| गुन | गुण | virtues |
| गाहा | गान | singing |
| लघु | छोटी | small |
| मति | बुद्धि | understanding |
| मोरि | मेरी | my |
| चरित | चरित्र; लीलाओं का वृत्तांत | the account of his deeds |
| अवगाहा | अथाह | unfathomably deep |
2 सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ।।
English explanation
Not a single method or means occurs to me; my mind and intellect are paupers, but my ambition is a king.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सूझ | सूझता है | occurs to me |
| न | नहीं | not |
| एकउ | एक भी | even one |
| अंग | विधि; ढंग | method; approach |
| उपाऊ | उपाय | means |
| मन | मन | mind |
| मति | बुद्धि | intellect |
| रंक | दरिद्र | paupers |
| मनोरथ | अभिलाषा | ambition |
| राऊ | राजा | a king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 28
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 28, 29
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।