बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी।।
मूल पाठ
आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी।।
सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी।।
स्रोत अभिलेख 1.8 · पुस्तक पृ. 28, 29
भावार्थ
मूल पाठ के बादचौरासी लाख योनियोंमें चार प्रकारके (स्वेदज, अण्डज, उद्भिज्ज, जरायुज) जीव जल, पृथ्वी और आकाशमें रहते हैं, उन सबसे भरे हुए इस सारे जगत्को श्रीसीताराममय जानकर मैं दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 28 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी।।
English explanation
The eighty-four lakh species of living beings, arising through four modes of birth, inhabit water, land, and sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आकर | उत्पत्ति के प्रकार | modes of birth |
| चारि | चार | four |
| लाख | लाख | hundred thousand |
| चौरासी | चौरासी | eighty-four |
| जाति | जातियाँ | species |
| जीव | जीवों की | of living beings |
| जल | जल | water |
| थल | भूमि | land |
| नभ | आकाश | sky |
| बासी | रहने वाले | inhabiting |
2 सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी।।
English explanation
Knowing the whole world to be pervaded by Sita and Rama, I bow with both hands joined.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता | Sita, Rama’s consort |
| राममय | राम से व्याप्त | pervaded by Rama |
| सब | समस्त | all |
| जग | जगत | the world |
| जानी | जानकर | knowing |
| करउँ | मैं करता हूँ | I make |
| प्रनाम | प्रणाम | a reverential bow |
| जोरि | जोड़कर | joining |
| जुग | दोनों | both |
| पानी | हाथ | hands |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 28
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 28, 29
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।