बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ बैंठैं देखहिं सब नारी। जथा जोगु निज कुल अनुहारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजहाँ अपने-अपने कुलके अनुसार सब स्त्रियाँ यथायोग्य (जिसको जहाँ बैठना उचित है) बैठकर देखेंगी। नगरके बालक कोमल वचन कह-कहकर आदरपूर्वक प्रभु श्रीरामचन्द्रजीको [यज्ञशालाकी] रचना दिखला रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 221 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जहँ बैंठैं देखहिं सब नारी। जथा जोगु निज कुल अनुहारी।।
पुर बालक कहि कहि मृदु बचना। सादर प्रभुहि देखावहिं रचना।।
स्रोत अभिलेख 1.224 · पुस्तक पृ. 220, 221
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जहँ बैंठैं देखहिं सब नारी। जथा जोगु निज कुल अनुहारी।।
English explanation
There all the women would sit and watch the ceremony, in places appropriate to their respective families.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| बैंठैं | बैठतीं | would sit |
| देखहिं | देखतीं | would watch |
| सब | सभी | all |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| जथा | जैसा | as |
| जोगु | उचित हो | appropriate |
| निज | अपने-अपने | their respective |
| कुल | कुल के | families |
| अनुहारी | अनुरूप | in keeping with |
2 पुर बालक कहि कहि मृदु बचना। सादर प्रभुहि देखावहिं रचना।।
English explanation
Speaking gentle words repeatedly, the town’s children respectfully showed Lord Rama the arrangements.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर के | of the town |
| बालक | बालक | children |
| कहि | कहते हुए | speaking |
| कहि | बार-बार कहते हुए | speaking repeatedly |
| मृदु | मधुर | gentle |
| बचना | वचन | words |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| प्रभुहि | प्रभु राम को | to Lord Rama |
| देखावहिं | दिखाते थे | would show |
| रचना | बनावट और व्यवस्था | the layout and arrangements |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.224
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 221
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 220, 221
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।