बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ तहँ जूथ जूथ मिलि भामिनि। सजि नव सप्त सकल दुति दामिनि।।
मूल पाठ
जहँ तहँ जूथ जूथ मिलि भामिनि। सजि नव सप्त सकल दुति दामिनि।।
बिधुबदनीं मृग सावक लोचनि। निज सरुप रति मानु बिमोचनि।।
स्रोत अभिलेख 1.297 · पुस्तक पृ. 281, 281
भावार्थ
मूल पाठ के बादबिजलीकी-सी कान्तिवाली चन्द्रमुखी, हरिनके बच्चेके-से नेत्रवाली और अपने सुन्दर रूपसे कामदेवकी स्त्री रतिके अभिमानको छुड़ानेवाली सुहागिनी स्त्रियाँ सभी सोलहों शृंगार सजकर, जहाँ-तहाँ झुंड-की-झुंड मिलकर,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 281 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जहँ तहँ जूथ जूथ मिलि भामिनि। सजि नव सप्त सकल दुति दामिनि।।
English explanation
Women gather everywhere in groups; adorned with all sixteen embellishments, they all shine like lightning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ; जगह-जगह | there; everywhere |
| जूथ | समूह | groups |
| जूथ | समूह; अलग-अलग टोलियाँ | groups; separate gatherings |
| मिलि | मिलकर; एकत्र होकर | having gathered |
| भामिनि | सुंदर स्त्रियाँ | beautiful women |
| सजि | सजकर | having adorned themselves |
| नव | नौ | nine |
| सप्त | सात | seven |
| सकल | सभी | all |
| दुति | कांति में | in radiance |
| दामिनि | बिजली के समान | like lightning |
2 बिधुबदनीं मृग सावक लोचनि। निज सरुप रति मानु बिमोचनि।।
English explanation
Their faces resemble the moon and their eyes those of fawns; their own beauty dispels Rati’s pride.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधुबदनीं | चंद्रमा जैसे मुख वाली स्त्रियाँ | women with moonlike faces |
| मृग | हिरण | deer |
| सावक | बच्चे | young; fawns |
| लोचनि | नेत्रों वाली | having eyes like those of |
| निज | अपने | their own |
| सरुप | रूप-सौंदर्य से | through beauty |
| रति | कामदेव की पत्नी रति का | of Rati, the wife of the love-god |
| मानु | गर्व | pride |
| बिमोचनि | दूर करने वाली | dispelling |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.297
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 281
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 281, 281
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।