बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गावहिं मंगल मंजुल बानीं। सुनिकल रव कलकंठि लजानीं।।
मूल पाठ
गावहिं मंगल मंजुल बानीं। सुनिकल रव कलकंठि लजानीं।।
भूप भवन किमि जाइ बखाना। बिस्व बिमोहन रचेउ बिताना।।
स्रोत अभिलेख 1.297 · पुस्तक पृ. 281, 281
भावार्थ
मूल पाठ के बादमनोहर वाणीसे मङ्गलगीत गा रही हैं, जिनके सुन्दर स्वरको सुनकर कोयलें भी लजा जाती हैं। राजमहलका वर्णन कैसे किया जाय, जहाँ विश्वको विमोहित करनेवाला मण्डप बनाया गया है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 281 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 गावहिं मंगल मंजुल बानीं। सुनिकल रव कलकंठि लजानीं।।
English explanation
They sing auspicious songs in lovely voices; hearing their sweet sound, even cuckoos are put to shame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गावहिं | गाती हैं | sing |
| मंगल | मंगलगीत | auspicious songs |
| मंजुल | सुंदर; मधुर | lovely; melodious |
| बानीं | वाणी में | in their voices |
| सुनिकल | मधुर ध्वनि सुनकर | on hearing the sweet sound |
| रव | स्वर; ध्वनि | sound; voice |
| कलकंठि | कोयलें | cuckoos |
| लजानीं | लजा जाती हैं | are put to shame |
2 भूप भवन किमि जाइ बखाना। बिस्व बिमोहन रचेउ बिताना।।
English explanation
How could the king’s palace be described? A canopy enchanting the whole world has been fashioned there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा का | the king’s |
| भवन | महल | palace |
| किमि | कैसे | how |
| जाइ | किया जा सके | can be |
| बखाना | वर्णन | described |
| बिस्व | संसार को | the world |
| बिमोहन | मोहित करने वाला | enchanting |
| रचेउ | रचा; सजाया गया | was fashioned |
| बिताना | वितान; सजावटी छत्र | decorative canopy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.297
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 281
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 281, 281
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।