बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब हरि माया दूरि निवारी। नहिं तहँ रमा न राजकुमारी।।
मूल पाठ
जब हरि माया दूरि निवारी। नहिं तहँ रमा न राजकुमारी।।
तब मुनि अति सभीत हरि चरना। गहे पाहि प्रनतारति हरना।।
स्रोत अभिलेख 1.138 · पुस्तक पृ. 147, 147
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब भगवान्ने अपनी मायाको हटा लिया, तब वहाँ न लक्ष्मी ही रह गयीं, न राजकुमारी ही। तब मुनिने अत्यन्त भयभीत होकर श्रीहरिके चरण पकड़ लिये और कहा—हे शरणागतके दु:खोंको हरनेवाले! मेरी रक्षा कीजिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 147 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जब हरि माया दूरि निवारी। नहिं तहँ रमा न राजकुमारी।।
English explanation
When Hari withdrew his illusion, neither Lakshmi nor the princess was there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| हरि | भगवान विष्णु ने | Lord Vishnu |
| माया | अपनी मायिक रचना | his illusory creation |
| दूरि | दूर | away |
| निवारी | हटा दी | removed |
| नहिं | नहीं थीं | was not present |
| तहँ | वहाँ | there |
| रमा | लक्ष्मी | Lakshmi, Vishnu’s consort |
| न | न ही | nor |
| राजकुमारी | राजा की पुत्री | the princess |
2 तब मुनि अति सभीत हरि चरना। गहे पाहि प्रनतारति हरना।।
English explanation
Then the deeply frightened sage Narada clasped Hari’s feet, pleading, “Protect me, remover of the distress of those who seek refuge.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मुनि | नारद मुनि | the sage Narada |
| अति | अत्यंत | extremely |
| सभीत | भयभीत | frightened |
| हरि | भगवान विष्णु के | of Lord Vishnu |
| चरना | चरण | feet |
| गहे | पकड़ लिए | clasped |
| पाहि | रक्षा कीजिए | protect me |
| प्रनतारति | शरणागतों की पीड़ा | the distress of those seeking refuge |
| हरना | हे हरने वाले | O remover |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.138
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 147
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 147, 147
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।