बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब तें सती जाइ तनु त्यागा। तब सें सिव मन भयउ बिरागा।।
मूल पाठ
जब तें सती जाइ तनु त्यागा। तब सें सिव मन भयउ बिरागा।।
जपहिं सदा रघुनायक नामा। जहँ तहँ सुनहिं राम गुन ग्रामा।।
स्रोत अभिलेख 1.75 · पुस्तक पृ. 91, 92
भावार्थ
मूल पाठ के बादजबसे सतीने जाकर शरीरत्याग किया, तबसे शिवजीके मनमें वैराग्य हो गया। वे सदा श्रीरघुनाथजीका नाम जपने लगे और जहाँ-तहाँ श्रीरामचन्द्रजीके गुणोंकी कथाएँ सुनने लगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 92 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जब तें सती जाइ तनु त्यागा। तब सें सिव मन भयउ बिरागा।।
English explanation
Ever since Sati went and gave up her body, dispassion arose in Shiva’s mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| तें | से | since |
| सती | सती, शिव की पत्नी | Sati, Shiva’s wife |
| जाइ | जाकर | having gone |
| तनु | शरीर | body |
| त्यागा | त्याग दिया | gave up |
| तब | तब | then |
| सें | से | since |
| सिव | शिव के | Shiva’s |
| मन | मन में | in the mind |
| भयउ | उत्पन्न हुआ | arose |
| बिरागा | वैराग्य | dispassion; detachment |
2 जपहिं सदा रघुनायक नामा। जहँ तहँ सुनहिं राम गुन ग्रामा।।
English explanation
Shiva always chants the name of Rama, leader of Raghu’s lineage, and hears accounts of Rama’s many virtues wherever he goes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जपहिं | जपते हैं | chants |
| सदा | सदा | always |
| रघुनायक | रघुवंश के नायक राम का | of Rama, leader of Raghu’s lineage |
| नामा | नाम | name |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ | there |
| सुनहिं | सुनते हैं | listens to |
| राम | राम के | Rama’s |
| गुन | गुण | virtues |
| ग्रामा | समूह, अनेक गुणों का वर्णन | multitude; accounts of many virtues |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 92
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 91, 92
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