बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।
मूल पाठ
जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।
राम भगत जग चारि प्रकारा। सुकृती चारिउ अनघ उदारा।।
स्रोत अभिलेख 1.22 · पुस्तक पृ. 43, 44
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[संकटसे घबराये हुए] आर्त भक्त नामजप करते हैं तो उनके बड़े भारी बुरे-बुरे संकट मिट जाते हैं और वे सुखी हो जाते हैं। जगत्में चार प्रकारके (१-अर्थार्थी—धनादिकी चाहसे भजनेवाले, २-आर्त—संकटकी निवृत्तिके लिये भजनेवाले, ३-जिज्ञासु—भगवान्को जाननेकी इच्छासे भजनेवाले, ४-ज्ञानी—भगवान्को तत्त्वसे जानकर स्वाभाविक ही प्रेमसे भजनेवाले) रामभक्त हैं और चारों ही पुण्यात्मा, पापरहित और उदार हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 44 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।
English explanation
People in great distress repeat Rama’s name; their terrible troubles disappear, and they become happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जपहिं | जपते हैं | repeat |
| नामु | राम का नाम | Rama’s name |
| जन | लोग | people |
| आरत | दुःखी या पीड़ित | distressed or afflicted |
| भारी | अत्यंत | greatly |
| मिटहिं | मिट जाते हैं | disappear |
| कुसंकट | घोर संकट | terrible troubles |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| सुखारी | सुखी | happy |
2 राम भगत जग चारि प्रकारा। सुकृती चारिउ अनघ उदारा।।
English explanation
There are four kinds of devotees of Rama in the world; all four are virtuous, sinless, and noble-hearted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| भगत | भक्त | devotees |
| जग | संसार में | in the world |
| चारि | चार | four |
| प्रकारा | प्रकार के | of kinds |
| सुकृती | पुण्य कर्म करने वाले | doers of virtuous deeds |
| चारिउ | चारों ही | all four |
| अनघ | पापरहित | sinless |
| उदारा | उदार हृदय वाले | noble-hearted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 44
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 43, 44
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।