बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जनक सुकृत मूरति बैदेही। दसरथ सुकृत रामु धरें देही।।
मूल पाठ
जनक सुकृत मूरति बैदेही। दसरथ सुकृत रामु धरें देही।।
इन्ह सम काँहु न सिव अवराधे। काहिं न इन्ह समान फल लाधे।।
स्रोत अभिलेख 1.31 · पुस्तक पृ. 291, 292
भावार्थ
मूल पाठ के बादजनकजीके सुकृत (पुण्य) की मूॢत जानकीजी हैं और दशरथजीके सुकृत देह धारण किये हुए श्रीरामजी हैं। इन [दोनों राजाओं] के समान किसीने शिवजीकी आराधना नहीं की; और न इनके समान किसीने फल ही पाये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 291 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जनक सुकृत मूरति बैदेही। दसरथ सुकृत रामु धरें देही।।
English explanation
Sita embodies Janaka’s merit, and Dasharatha’s merit has taken bodily form as Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | राजा जनक के | of King Janaka |
| सुकृत | पुण्य की | of accumulated merit |
| मूरति | साकार मूर्ति | embodiment |
| बैदेही | विदेह-कन्या सीता | Sita, daughter of the king of Videha |
| दसरथ | राजा दशरथ के | of King Dasharatha |
| सुकृत | पुण्य | accumulated merit |
| रामु | राम के रूप में | as Rama |
| धरें | धारण किए हुए | having assumed |
| देही | शरीर | a body |
2 इन्ह सम काँहु न सिव अवराधे। काहिं न इन्ह समान फल लाधे।।
English explanation
No one has worshipped Shiva as these two have, nor has anyone obtained a reward like theirs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इन्ह | इन दोनों के | these two, Janaka and Dasharatha |
| सम | समान | like |
| काँहु | किसी ने | anyone |
| न | नहीं | not |
| सिव | शिव की | Shiva |
| अवराधे | आराधना की | worshipped |
| काहिं | किसी ने | anyone |
| न | नहीं | not |
| इन्ह | इन दोनों के | these two’s |
| समान | समान | equal to |
| फल | फल | reward |
| लाधे | प्राप्त किए | obtained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 291
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 291, 292
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