बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जनक सनेहु सीलु करतूती। नृपु सब भाँति सराह बिभूती।।
मूल पाठ
जनक सनेहु सीलु करतूती। नृपु सब भाँति सराह बिभूती।।
दिन उठि बिदा अवधपति मागा। राखहिं जनकु सहित अनुरागा।।
स्रोत अभिलेख 1.332 · पुस्तक पृ. 317, 317
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा दशरथजी जनकजीके स्नेह, शील, करनी और ऐश्वर्यकी सब प्रकारसे सराहना करते हैं। प्रतिदिन [सबेरे] उठकर अयोध्यानरेश विदा माँगते हैं। पर जनकजी उन्हें प्रेमसे रख लेते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 317 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जनक सनेहु सीलु करतूती। नृपु सब भाँति सराह बिभूती।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: King Dasharatha praises Janaka’s affection, character, conduct, and magnificence in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | राजा जनक का | King Janaka’s |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| सीलु | शील; सद्स्वभाव | gentle character |
| करतूती | आचरण और कार्य | conduct and deeds |
| नृपु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सब | सभी | every |
| भाँति | प्रकार से | way; manner |
| सराह | सराहते हैं | praises |
| बिभूती | वैभव और समृद्धि | magnificence and prosperity |
2 दिन उठि बिदा अवधपति मागा। राखहिं जनकु सहित अनुरागा।।
English explanation
Each day, on rising, Dasharatha, lord of Ayodhya, asks leave to depart, but Janaka lovingly keeps him there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिन | प्रतिदिन | each day |
| उठि | उठकर | having risen |
| बिदा | विदा; प्रस्थान की अनुमति | leave to depart |
| अवधपति | अवध के राजा दशरथ | Dasharatha, lord of Ayodhya |
| मागा | माँगते हैं | asks for |
| राखहिं | रोक लेते हैं | keeps him from leaving |
| जनकु | राजा जनक | King Janaka |
| सहित | के साथ | with |
| अनुरागा | प्रेम | affection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.332
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 317
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 317, 317
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।