बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जनक बचन सुनि सब नर नारी। देखि जानकिहि भए दुखारी।।
मूल पाठ
जनक बचन सुनि सब नर नारी। देखि जानकिहि भए दुखारी।।
माखे लखनु कुटिल भइँ भौंहें। रदपट फरकत नयन रिसौंहें।।
स्रोत अभिलेख 1.252 · पुस्तक पृ. 245, 245
भावार्थ
मूल पाठ के बादजनकके वचन सुनकर सभी स्त्री-पुरुष जानकीजीकी ओर देखकर दु:खी हुए, परन्तु लक्ष्मणजी तमतमा उठे, उनकी भौंहें टेढ़ी हो गयीं, ओठ फड़कने लगे और नेत्र क्रोधसे लाल हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 245 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जनक बचन सुनि सब नर नारी। देखि जानकिहि भए दुखारी।।
English explanation
Hearing Janaka’s words and looking at Sita, all the men and women became sorrowful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | सीता के पिता राजा जनक के | of King Janaka, Sita’s father |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सब | सभी | all |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| देखि | देखकर | having seen |
| जानकिहि | जनक की पुत्री सीता को | Sita, Janaka’s daughter |
| भए | हो गए | became |
| दुखारी | दुखी | sorrowful |
2 माखे लखनु कुटिल भइँ भौंहें। रदपट फरकत नयन रिसौंहें।।
English explanation
Lakshmana grew angry; his brows bent, his lips quivered, and his eyes were full of anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| माखे | क्रोधित हुए | grew angry |
| लखनु | राम के छोटे भाई लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| कुटिल | टेढ़ी | bent |
| भइँ | हो गईं | became |
| भौंहें | भौंहें | eyebrows |
| रदपट | होंठ | lips |
| फरकत | फड़क रहे थे | were quivering |
| नयन | आँखें | eyes |
| रिसौंहें | क्रोधभरी | angry |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.252
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 245
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 245, 245
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