बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे भाई! जगत्में तालाबों और नदियोंके समान मनुष्य ही अधिक हैं, जो जल पाकर अपनी ही बाढ़से बढ़ते हैं (अर्थात् अपनी ही उन्नतिसे प्रसन्न होते हैं)। समुद्र-सा तो कोई एक विरला ही सज्जन होता है जो चन्द्रमाको पूर्ण देखकर (दूसरोंका उत्कर्ष देखकर) उमड़ पड़ता है॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 29 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।
सज्जन सकृत सिंधु सम कोई। देखि पूर बिधु बाढ़इ जोई।।
स्रोत अभिलेख 1.8 · पुस्तक पृ. 28, 29
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।
English explanation
Brother, many people in the world are like lakes and rivers, swelling with their own increase when they receive water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग | संसार में | in the world |
| बहु | बहुत | many |
| नर | मनुष्य | people |
| सर | तालाब | lakes |
| सरि | नदियाँ | rivers |
| सम | जैसे | like |
| भाई | हे भाई | O brother |
| जे | जो | who |
| निज | अपनी | their own |
| बाढ़ि | बढ़ती; उन्नति | increase; advancement |
| बढ़हिं | बढ़ते हैं | swell |
| जल | जल | water |
| पाई | पाकर | having received |
2 सज्जन सकृत सिंधु सम कोई। देखि पूर बिधु बाढ़इ जोई।।
English explanation
Rare is the good person like the ocean, which rises on seeing the full moon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सज्जन | सज्जन | a good person |
| सकृत | विरला | rare |
| सिंधु | समुद्र | the ocean |
| सम | जैसा | like |
| कोई | कोई | someone |
| देखि | देखकर | on seeing |
| पूर | पूर्ण | full |
| बिधु | चंद्रमा | moon |
| बाढ़इ | बढ़ता है; उमड़ता है | rises; swells |
| जोई | जो | who; which |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 29
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 28, 29
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।