बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू ।
मूल पाठ
छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू ।
बोले चितइ परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।।
स्रोत अभिलेख 1.272 · पुस्तक पृ. 261, 261
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर यह तो छूते ही टूट गया, इसमें रघुनाथजीका भी कोई दोष नहीं है। मुनि! आप बिना ही कारण किसलिये क्रोध करते हैं? परशुरामजी अपने फरसेकी ओर देखकर बोले—अरे दुष्ट! तूने मेरा स्वभाव नहीं सुना॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 261 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू ।
English explanation
“It broke as soon as it was touched; Rama is not at fault either. O sage, why be angry without cause?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छुअत | छूते ही | as soon as touched |
| टूट | टूट गया | broke |
| रघुपतिहु | रघुपति राम का भी | of Rama, lord of Raghu’s line, either |
| न | नहीं | not |
| दोसू | दोष | fault |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| बिनु | बिना | without |
| काज | कारण | cause |
| करिअ | कीजिए | should you make |
| कत | क्यों | why |
| रोसू | क्रोध | anger |
2 बोले चितइ परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।।
English explanation
Looking toward his axe, Parashurama said, “You fool, have you not heard of my nature?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | बोले | said |
| चितइ | देखकर | looking |
| परसु | फरसे | axe |
| की | की | of |
| ओरा | ओर | direction |
| रे | अरे | hey |
| सठ | मूर्ख | fool |
| सुनेहि | तूने सुना है | have you heard |
| सुभाउ | स्वभाव | nature |
| न | नहीं | not |
| मोरा | मेरा | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.272
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 261
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 261, 261
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