बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चौंकें भाँति अनेक पुराईं। सिंधुर मनिमय सहज सुहाई।।
मूल पाठ
चौंकें भाँति अनेक पुराईं। सिंधुर मनिमय सहज सुहाई।।
स्रोत अभिलेख 1.288 · पुस्तक पृ. 274, 274
भावार्थ
मूल पाठ के बादगजमुक्ताओंके सहज ही सुहावने अनेकों तरहके चौक पुराये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 274 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चौंकें भाँति अनेक पुराईं। सिंधुर मनिमय सहज सुहाई।।
English explanation
Ritual floor designs were laid out in many forms; vermilion made from gems looked naturally beautiful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चौंकें | मांगलिक चौक-सज्जाएँ | auspicious floor designs |
| भाँति | प्रकार | kinds |
| अनेक | अनेक | many |
| पुराईं | रचकर भरी गईं | were laid out and filled |
| सिंधुर | सिंदूर | vermilion |
| मनिमय | मणियों से बना | made from gems |
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| सुहाई | सुंदर | beautiful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.288
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 274
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 274, 274
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।