बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
किए भृंग बहुरंग बिहंगा। गुंजहिं कूजहिं पवन प्रसंगा।।
मूल पाठ
किए भृंग बहुरंग बिहंगा। गुंजहिं कूजहिं पवन प्रसंगा।।
सुर प्रतिमा खंभन गढ़ी काढ़ी। मंगल द्रब्य लिएँ सब ठाढ़ी।।
स्रोत अभिलेख 1.288 · पुस्तक पृ. 274, 274
भावार्थ
मूल पाठ के बादभौंरे और बहुत रंगोंके पक्षी बनाये, जो हवाके सहारे गूँजते और कूजते थे। खंभोंपर देवताओंकी मूॢतयाँ गढ़कर निकालीं, जो सब मङ्गलद्रव्य लिये खड़ी थीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 274 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 किए भृंग बहुरंग बिहंगा। गुंजहिं कूजहिं पवन प्रसंगा।।
English explanation
Bees and multicolored birds were made; when touched by the wind, they buzzed and warbled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| किए | बनाए | made |
| भृंग | भौंरे | bees |
| बहुरंग | अनेक रंगों वाले | multicolored |
| बिहंगा | पक्षी | birds |
| गुंजहिं | गूँजते हैं | buzz |
| कूजहिं | कूजते हैं | warble |
| पवन | हवा | wind |
| प्रसंगा | के संपर्क से | through contact with |
2 सुर प्रतिमा खंभन गढ़ी काढ़ी। मंगल द्रब्य लिएँ सब ठाढ़ी।।
English explanation
Images of the gods were sculpted on the pillars; all stood holding auspicious objects.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं की | of the gods |
| प्रतिमा | प्रतिमाएँ | images |
| खंभन | खंभों पर | on the pillars |
| गढ़ी | गढ़ी गईं | sculpted |
| काढ़ी | उकेरी गईं | carved out |
| मंगल | शुभ | auspicious |
| द्रब्य | सामग्री | objects |
| लिएँ | लिए हुए | holding |
| सब | सभी प्रतिमाएँ | all the images |
| ठाढ़ी | खड़ी थीं | stood |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.288
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 274
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 274, 274
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।