बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चितवत चारु मार मनु हरनी। भावति हृदय जाति नहीं बरनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसुन्दर चितवन [सारे संसारके मनको हरनेवाले] कामदेवके भी मनको हरनेवाली है। वह हृदयको बहुत ही प्यारी लगती है, पर उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। सुन्दर गाल हैं, कानोंमें चञ्चल (झूमते हुए) कुण्डल हैं। ठोड़ी और अधर (ओठ) सुन्दर हैं, कोमल वाणी है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 236 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चितवत चारु मार मनु हरनी। भावति हृदय जाति नहीं बरनी।।
कल कपोल श्रुति कुंडल लोला। चिबुक अधर सुंदर मृदु बोला।।
स्रोत अभिलेख 1.243 · पुस्तक पृ. 236, 237
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चितवत चारु मार मनु हरनी। भावति हृदय जाति नहीं बरनी।।
English explanation
Their lovely glance captivates even the god of love; it delights the heart and cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चितवत | चितवन; देखने की भंगिमा | glance |
| चारु | सुंदर | lovely |
| मार | कामदेव का | of the god of love |
| मनु | मन | heart |
| हरनी | हर लेने वाली | captivating |
| भावति | प्रिय लगती है | delights |
| हृदय | हृदय को | the heart |
| जाति | जा सकती है | can be |
| नहीं | नहीं | not |
| बरनी | वर्णित | described |
2 कल कपोल श्रुति कुंडल लोला। चिबुक अधर सुंदर मृदु बोला।।
English explanation
Their cheeks are lovely, and earrings sway at their ears; their chins and lips are beautiful, and their speech is gentle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कल | सुंदर | lovely |
| कपोल | गाल | cheeks |
| श्रुति | कानों में | at the ears |
| कुंडल | कान के आभूषण | earrings |
| लोला | झूलते हुए | swaying |
| चिबुक | ठोड़ी | chins |
| अधर | होंठ | lips |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बोला | वाणी; बोल | speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.243
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 236
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 236, 237
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।