बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चाप सपीप रामु जब आए। नर नारिन्ह सुर सुकृत मनाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजी जब धनुषके समीप आये, तब सब स्त्री-पुरुषोंने देवताओं और पुण्योंको मनाया। सबका सन्देह और अज्ञान, नीच राजाओंका अभिमान,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 251 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चाप सपीप रामु जब आए। नर नारिन्ह सुर सुकृत मनाए।।
सब कर संसउ अरु अग्यानू। मंद महीपन्ह कर अभिमानू।।
स्रोत अभिलेख 1.26 · पुस्तक पृ. 251, 252
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चाप सपीप रामु जब आए। नर नारिन्ह सुर सुकृत मनाए।।
English explanation
When Rama approached the bow, the men and women invoked the gods and their accumulated merit for a favorable outcome.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चाप | धनुष के | of the bow |
| सपीप | पास; निकट | near |
| रामु | श्रीराम | Rama |
| जब | जब | when |
| आए | आए | came; approached |
| नर | पुरुषों ने | the men |
| नारिन्ह | स्त्रियों ने | the women |
| सुर | देवताओं को | the gods |
| सुकृत | अपने संचित पुण्यों को | their accumulated merit |
| मनाए | मनाया; अनुकूलता की प्रार्थना की | invoked for favor |
2 सब कर संसउ अरु अग्यानू। मंद महीपन्ह कर अभिमानू।।
English explanation
Everyone’s doubts and ignorance, and the pride of foolish kings—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सबका; सभी | everyone |
| कर | का | of; possessive marker |
| संसउ | संदेह | doubt |
| अरु | और | and |
| अग्यानू | अज्ञान | ignorance |
| मंद | मूर्ख; मंदबुद्धि | foolish |
| महीपन्ह | राजाओं | kings |
| कर | का | of; possessive marker |
| अभिमानू | अभिमान | pride |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 251
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 251, 252
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