बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चरन सरोज धूरि धरि सीसा। मुदित महीपति पाइ असीसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनके चरणकमलोंकी धूलि सिरपर धरकर और आशिष पाकर राजा आनन्दित हुए और गणेशजीका स्मरण करके उन्होंने प्रस्थान किया। मङ्गलोंके मूल अनेकों शकुन हुए॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 323 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चरन सरोज धूरि धरि सीसा। मुदित महीपति पाइ असीसा।।
सुमिरि गजाननु कीन्ह पयाना। मंगलमूल सगुन भए नाना।।
स्रोत अभिलेख 1.339 · पुस्तक पृ. 322, 323
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चरन सरोज धूरि धरि सीसा। मुदित महीपति पाइ असीसा।।
English explanation
Placing the dust of the Brahmins' lotus feet upon his head and receiving their blessings, King Dasharatha rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | चरण | feet |
| सरोज | कमल | lotuses |
| धूरि | धूल | dust |
| धरि | धारण करके | having placed |
| सीसा | सिर पर | upon his head |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| महीपति | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| पाइ | पाकर | having received |
| असीसा | आशीर्वाद | blessings |
2 सुमिरि गजाननु कीन्ह पयाना। मंगलमूल सगुन भए नाना।।
English explanation
Remembering Ganesha, the king set out; many omens heralding good fortune appeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| गजाननु | हाथी-मुख वाले गणेश | Ganesha, the elephant-headed deity |
| कीन्ह | किया | made |
| पयाना | प्रस्थान | departure |
| मंगलमूल | मंगल के मूल; कल्याणसूचक | sources of good fortune; auspicious |
| सगुन | शकुन | omens |
| भए | हुए; प्रकट हुए | appeared |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.339
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 323
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 322, 323
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।