बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुर बसिष्ठ कहँ गयउ हँकारा। आए द्विजन सहित नृपद्वारा।।
मूल पाठ
गुर बसिष्ठ कहँ गयउ हँकारा। आए द्विजन सहित नृपद्वारा।।
अनुपम बालक देखेन्हि जाई। रूप रासि गुन कहि न सिराई।।
स्रोत अभिलेख 1.193 · पुस्तक पृ. 193, 194
भावार्थ
मूल पाठ के बादगुरु वसिष्ठजीके पास बुलावा गया। वे ब्राह्मणोंको साथ लिये राजद्वारपर आये। उन्होंने जाकर अनुपम बालकको देखा, जो रूपकी राशि है और जिसके गुण कहनेसे समाप्त नहीं होते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 194 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुर बसिष्ठ कहँ गयउ हँकारा। आए द्विजन सहित नृपद्वारा।।
English explanation
A summons went to the royal preceptor Vashishtha. He came to the king's doorway accompanied by Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | royal preceptor |
| बसिष्ठ | ऋषि वसिष्ठ | the sage Vashishtha |
| कहँ | के पास | to |
| गयउ | गया | went |
| हँकारा | बुलावा | a summons |
| आए | आए | came |
| द्विजन | ब्राह्मणों के | Brahmins |
| सहित | साथ | accompanied by |
| नृपद्वारा | राजा के द्वार पर | to the king's doorway |
2 अनुपम बालक देखेन्हि जाई। रूप रासि गुन कहि न सिराई।।
English explanation
They went and saw the incomparable child, an embodiment of beauty whose qualities cannot be exhaustively described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुपम | अतुलनीय | incomparable |
| बालक | बालक को | the child |
| देखेन्हि | उन्होंने देखा | they saw |
| जाई | जाकर | having gone |
| रूप | सौंदर्य की | of beauty |
| रासि | राशि; भंडार | abundance; embodiment |
| गुन | गुणों का वर्णन | the qualities |
| कहि | कहकर | by describing |
| न | नहीं | not |
| सिराई | समाप्त किया जा सकता | can be exhausted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.193
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 194
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 193, 194
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।