बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी।।
मूल पाठ
गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी।।
सेवक स्वामि सखा सिय पी के। हित निरुपधि सब बिधि तुलसीके।।
स्रोत अभिलेख 1.15 · पुस्तक पृ. 37, 38
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीमहेश और पार्वतीको मैं प्रणाम करता हूँ, जो मेरे गुरु और माता-पिता हैं, जो दीनबन्धु और नित्य दान करनेवाले हैं, जो सीतापति श्रीरामचन्द्रजीके सेवक, स्वामी और सखा हैं तथा मुझ तुलसीदासका सब प्रकारसे कपटरहित (सच्चा) हित करनेवाले हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 37 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी।।
English explanation
I bow to Shiva and Bhavani as teacher, father, and mother, friends of the lowly and generous givers; the reading 'दिन' here is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | teacher |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| महेस | महेश, शिव | Shiva, the great Lord |
| भवानी | भवानी, पार्वती | Bhavani, Parvati |
| प्रनवउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| दीनबंधु | दीनों के बंधु और सहायक | friends and helpers of the lowly |
| दिन | दिन; ‘दिन दानी’ में दिन या प्रकाश देने वाला सूर्य। | Day; in ‘दिन दानी,’ the sun as the giver of daylight. |
| दानी | दान देने वाले | generous givers |
2 सेवक स्वामि सखा सिय पी के। हित निरुपधि सब बिधि तुलसीके।।
English explanation
They are servants, lords, and friends of Rama, Sita’s husband, and Tulsi’s unconditional well-wishers in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवक | सेवक | servants |
| स्वामि | स्वामी | lords |
| सखा | मित्र | friends |
| सिय | सीता | Sita |
| पी | पति, राम | husband, Rama |
| के | के | of |
| हित | हितैषी | well-wishers |
| निरुपधि | बिना स्वार्थ या शर्त के | without self-interest or conditions |
| सब | सभी | every |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| तुलसीके | तुलसीदास के | of Tulsidas |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 37
- सहायक विषय
- वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 37, 38
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।