बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गननायक बरदायक देवा। आजु लगें कीन्हिउँ तुअ सेवा।।
मूल पाठ
गननायक बरदायक देवा। आजु लगें कीन्हिउँ तुअ सेवा।।
बार बार बिनती सुनि मोरी। करहु चाप गुरुता अति थोरी।।
स्रोत अभिलेख 1.257 · पुस्तक पृ. 249, 249
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे गणोंके नायक, वर देनेवाले देवता गणेशजी! मैंने आजहीके लिये तुम्हारी सेवा की थी। बार-बार मेरी विनती सुनकर धनुषका भारीपन बहुत ही कम कर दीजिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 249 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गननायक बरदायक देवा। आजु लगें कीन्हिउँ तुअ सेवा।।
English explanation
O Ganesha, leader of the divine attendants and giver of boons, I have served you up to this day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गननायक | हे गणों के नायक गणेश | O Ganesha, leader of the divine attendants |
| बरदायक | वर देने वाले | giver of boons |
| देवा | हे देव | O god |
| आजु | आज | today |
| लगें | तक | up to |
| कीन्हिउँ | मैंने की है | I have performed |
| तुअ | आपकी | your |
| सेवा | सेवा | service |
2 बार बार बिनती सुनि मोरी। करहु चाप गुरुता अति थोरी।।
English explanation
Hear my repeated plea and make the bow's weight very slight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| बिनती | विनती | plea |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मोरी | मेरी | my |
| करहु | कर दीजिए | make |
| चाप | धनुष का | the bow's |
| गुरुता | भारीपन | weight |
| अति | बहुत | very |
| थोरी | कम | slight |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.257
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 249
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 249, 249
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।