बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खल अघ अगुन साधू गुन गाहा। उभय अपार उदधि अवगाहा।।
मूल पाठ
खल अघ अगुन साधू गुन गाहा। उभय अपार उदधि अवगाहा।।
तेहि तें कछु गुन दोष बखाने। संग्रह त्याग न बिनु पहिचाने।।
स्रोत अभिलेख 1.6 · पुस्तक पृ. 25, 26
भावार्थ
मूल पाठ के बाददुष्टोंके पापों और अवगुणोंकी और साधुओंके गुणोंकी कथाएँ—दोनों ही अपार और अथाह समुद्र हैं। इसीसे कुछ गुण और दोषोंका वर्णन किया गया है, क्योंकि बिना पहचाने उनका ग्रहण या त्याग नहीं हो सकता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 25 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 खल अघ अगुन साधू गुन गाहा। उभय अपार उदधि अवगाहा।।
English explanation
AI draft: Recounting the sins and faults of the wicked and the virtues of the saintly are both like entering a boundless ocean.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खल | दुष्टों के | of the wicked |
| अघ | पाप | sins |
| अगुन | दोष | faults |
| साधू | साधुओं के | of the saintly |
| गुन | गुण | virtues |
| गाहा | वर्णन करना | recounting |
| उभय | दोनों | both |
| अपार | अथाह | boundless |
| उदधि | समुद्र | ocean |
| अवगाहा | में उतरना | entering into |
2 तेहि तें कछु गुन दोष बखाने। संग्रह त्याग न बिनु पहिचाने।।
English explanation
For that reason, some virtues and faults have been described: without discerning them, one cannot embrace virtues or discard faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उसी कारण | that reason |
| तें | से | because of |
| कछु | कुछ | some |
| गुन | गुण | virtues |
| दोष | दोष | faults |
| बखाने | बताए हैं | have described |
| संग्रह | ग्रहण करना | acceptance |
| त्याग | छोड़ना | rejection |
| न | नहीं | not |
| बिनु | बिना | without |
| पहिचाने | पहचाने | discerning them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 25
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 25, 26
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।