बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कौसल्या जब बोलन जाई। ठुमकु ठुमकु प्रभु चलहिं पराई।।
मूल पाठ
कौसल्या जब बोलन जाई। ठुमकु ठुमकु प्रभु चलहिं पराई।।
निगम नेति सिव अंत न पावा। ताहि धरै जननी हठि धावा।।
स्रोत अभिलेख 1.203 · पुस्तक पृ. 202, 202
भावार्थ
मूल पाठ के बादकौसल्याजी जब बुलाने जाती हैंं, तब प्रभु ठुमुक-ठुमुक भाग चलते हैं। जिनका वेद 'नेति (इतना ही नहीं) कहकर निरूपण करते हैं और शिवजीने जिनका अन्त नहीं पाया, माता उन्हें हठपूर्वक पकडऩेके लिये दौड़ती हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 202 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कौसल्या जब बोलन जाई। ठुमकु ठुमकु प्रभु चलहिं पराई।।
English explanation
When Kausalya goes to call him, the Lord toddles away from her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्या | राम की माता कौसल्या | Kausalya, Rama’s mother |
| जब | जब | when |
| बोलन | बुलाने | to call him |
| जाई | जाती हैं | goes |
| ठुमकु | ठुमकते हुए | with toddling steps |
| ठुमकु | ठुमकते हुए | with toddling steps |
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord Rama |
| चलहिं | चलते हैं | walks |
| पराई | दूर भागकर | away, in flight |
2 निगम नेति सिव अंत न पावा। ताहि धरै जननी हठि धावा।।
English explanation
The mother determinedly runs to catch the very one whom the Vedas describe as ‘not this’ and whose limit even Shiva could not fathom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निगम | वेद | the Vedas |
| नेति | ‘यह नहीं’ | ‘not this’ |
| सिव | भगवान शिव | the god Shiva |
| अंत | अंत या सीमा | end or limit |
| न | नहीं | not |
| पावा | पा सके | could fathom |
| ताहि | उन्हीं को | that very one |
| धरै | पकड़ने के लिए | to catch |
| जननी | माता कौसल्या | his mother Kausalya |
| हठि | हठपूर्वक | determinedly |
| धावा | दौड़ती हैं | runs |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.203
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 202
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 202, 202
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।