बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोउ कह ए भूपति पहिचाने। मुनि समेत सादर सनमाने।।
मूल पाठ
कोउ कह ए भूपति पहिचाने। मुनि समेत सादर सनमाने।।
सखि परंतु पनु राउ न तजई। बिधि बस हठि अबिबेकहि भजई।।
स्रोत अभिलेख 1.222 · पुस्तक पृ. 219, 219
भावार्थ
मूल पाठ के बादकिसीने कहा—राजाने इन्हें पहचान लिया है और मुनिके सहित इनका आदरपूर्वक सम्मान किया है। परन्तु हे सखी! राजा अपना प्रण नहीं छोड़ता। वह होनहारके वशीभूत होकर हठपूर्वक अविवेकका ही आश्रय लिये हुए है (प्रणपर अड़े रहनेकी मूर्खता नहीं छोड़ता)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 219 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कोउ कह ए भूपति पहिचाने। मुनि समेत सादर सनमाने।।
English explanation
Another says, “The king has already recognized them and respectfully honored them together with the sage.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोउ | कोई सखी | another companion |
| कह | कहती है | says |
| ए | इन्हें, राजकुमारों को | them, the princes |
| भूपति | राजा जनक ने | King Janaka |
| पहिचाने | पहचान लिया है | has recognized |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| समेत | सहित | together with |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सनमाने | सम्मान किया है | has honored |
2 सखि परंतु पनु राउ न तजई। बिधि बस हठि अबिबेकहि भजई।।
English explanation
But, friend, the king does not abandon his vow; under fate’s sway, he stubbornly clings to a lack of discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखि | हे सखी | O friend |
| परंतु | लेकिन | but |
| पनु | प्रतिज्ञा | vow |
| राउ | राजा जनक | King Janaka |
| न | नहीं | not |
| तजई | छोड़ते हैं | abandons |
| बिधि | विधि, भाग्य के | of fate |
| बस | वश में | under the sway |
| हठि | हठपूर्वक | stubbornly |
| अबिबेकहि | अविवेक का | lack of discernment |
| भजई | आश्रय लेते हैं | clings to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.222
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 219
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 219, 219
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