बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कैकेई कहँ नृप सो दयऊ। रह्यो सो उभय भाग पुनि भयऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह (उनमेंसे एक भाग) राजाने कैकेयीको दिया। शेष जो बच रहा उसके फिर दो भाग हुए और राजाने उनको कौसल्या और कैकेयीके हाथपर रखकर (अर्थात् उनकी अनुमति लेकर) और इस प्रकार उनका मन प्रसन्न करके सुमित्राको दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 190 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कैकेई कहँ नृप सो दयऊ। रह्यो सो उभय भाग पुनि भयऊ।।
कौसल्या कैकेई हाथ धरि। दीन्ह सुमित्रहि मन प्रसन्न करि।।
स्रोत अभिलेख 1.19 · पुस्तक पृ. 190, 191
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कैकेई कहँ नृप सो दयऊ। रह्यो सो उभय भाग पुनि भयऊ।।
English explanation
The king gave one of those portions to Kaikeyi. What remained was again divided into two portions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कैकेई | रानी कैकेई | Queen Kaikeyi |
| कहँ | को | to |
| नृप | राजा ने | the king |
| सो | वह भाग | that portion |
| दयऊ | दिया | gave |
| रह्यो | बचा | remained |
| सो | वह बचा हुआ हिस्सा | that remainder |
| उभय | दो | two |
| भाग | हिस्से | portions |
| पुनि | फिर | again |
| भयऊ | हो गया | became |
2 कौसल्या कैकेई हाथ धरि। दीन्ह सुमित्रहि मन प्रसन्न करि।।
English explanation
The king placed those portions in Kausalya's and Kaikeyi's hands and, with a glad heart, had them given to Sumitra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्या | रानी कौसल्या के | Queen Kausalya's |
| कैकेई | रानी कैकेई के | Queen Kaikeyi's |
| हाथ | हाथों में | in the hands |
| धरि | रखकर | having placed |
| दीन्ह | दिया | gave |
| सुमित्रहि | सुमित्रा को | to Queen Sumitra |
| मन | मन को | the heart |
| प्रसन्न | प्रसन्न | glad |
| करि | करके | having made |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 190
- सहायक विषय
- राजा दशरथका पुत्रेष्टि यज्ञ, रानियोंका गर्भवती होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 190, 191
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।