बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कैकयसुता सुमित्रा दोऊ। सुंदर सुत जनमत भैं ओऊ।।
मूल पाठ
कैकयसुता सुमित्रा दोऊ। सुंदर सुत जनमत भैं ओऊ।।
वह सुख संपति समय समाजा। कहि न सकइ सारद अहिराजा।।
स्रोत अभिलेख 1.195 · पुस्तक पृ. 195, 195
भावार्थ
मूल पाठ के बादकैकेयी और सुमित्रा—इन दोनोंने भी सुन्दर पुत्रोंको जन्म दिया। उस सुख, सम्पत्ति, समय और समाजका वर्णन सरस्वती और सर्पोंके राजा शेषजी भी नहीं कर सकते॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 195 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कैकयसुता सुमित्रा दोऊ। सुंदर सुत जनमत भैं ओऊ।।
English explanation
AI draft: Kaikeyi and Sumitra, both of them too, gave birth to beautiful sons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कैकयसुता | कैकय की पुत्री, रानी कैकेयी | Kaikeyi, daughter of the king of Kekaya |
| सुमित्रा | दशरथ की रानी सुमित्रा | Sumitra, a queen of Dasharatha |
| दोऊ | दोनों | both |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सुत | पुत्र | sons |
| जनमत | जन्म देने वाली | giving birth to |
| भैं | हुईं | became |
| ओऊ | वे भी | they too |
2 वह सुख संपति समय समाजा। कहि न सकइ सारद अहिराजा।।
English explanation
Even Saraswati and Shesha, king of serpents, cannot describe that joy, prosperity, and festive gathering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| वह | वह | that |
| सुख | आनंद | joy |
| संपति | समृद्धि | prosperity |
| समय | अवसर | occasion |
| समाजा | उत्सवी आयोजन और जमावड़ा | festive arrangements and gathering |
| कहि | वर्णन कर | describe |
| न | नहीं | not |
| सकइ | सकते | can |
| सारद | वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of speech |
| अहिराजा | नागराज शेष | Shesha, king of serpents |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.195
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 195
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 195, 195
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।