बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवधपुरी सोहइ एहि भाँती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअवधपुरी इस प्रकार सुशोभित हो रही है, मानो रात्रि प्रभुसे मिलने आयी हो और सूर्यको देखकर मानो मनमें सकुचा गयी हो, परन्तु फिर भी मनमें विचारकर वह मानो सन्ध्या बन [कर रह] गयी हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 195 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अवधपुरी सोहइ एहि भाँती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती।।
देखि भानू जनु मन सकुचानी। तदपि बनी संध्या अनुमानी।।
स्रोत अभिलेख 1.195 · पुस्तक पृ. 195, 195
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अवधपुरी सोहइ एहि भाँती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती।।
English explanation
Ayodhya shines as though night has come to meet the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवधपुरी | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| सोहइ | शोभित होती है | shines splendidly |
| एहि | इस | this |
| भाँती | प्रकार | way |
| प्रभुहि | प्रभु राम से | the Lord Rama |
| मिलन | मिलने के लिए | to meet |
| आई | आई है | has come |
| जनु | मानो | as though |
| राती | रात्रि | night |
2 देखि भानू जनु मन सकुचानी। तदपि बनी संध्या अनुमानी।।
English explanation
Seeing the sun, night seemed to grow shy at heart; nevertheless, she appeared in the guise of twilight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| भानू | सूर्य | the sun |
| जनु | मानो | as though |
| मन | मन में | at heart |
| सकुचानी | सकुचा गई | grew shy |
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| बनी | बन गई | became |
| संध्या | संध्या | twilight |
| अनुमानी | अनुमान में ऐसी प्रतीत होती हुई | seeming so to the imagination |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.195
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 195
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 195, 195
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।