बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी। बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी।।
मूल पाठ
कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी। बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी।।
एहि बिधि हित तुम्हार मैं ठयऊ। कहि अस अंतरहित प्रभु भयऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.133 · पुस्तक पृ. 143, 143
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे योगी मुनि! सुनिये, रोगसे व्याकुल रोगी कुपथ्य माँगे तो वैद्य उसे नहीं देता। इसी प्रकार मैंने भी तुम्हारा हित करनेकी ठान ली है। ऐसा कहकर भगवान् अन्तर्धान हो गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 143 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी। बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी।।
English explanation
AI draft: Listen, sage and yogi! If a patient distressed by illness asks for something harmful to his health, the physician does not give it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुपथ | अहितकर आहार या आचरण | unwholesome food or conduct |
| माग | माँगे | asks for |
| रुज | रोग से | by illness |
| ब्याकुल | व्याकुल | distressed |
| रोगी | रोगी व्यक्ति | the patient |
| बैद | वैद्य | the physician |
| न | नहीं | not |
| देइ | देता है | gives |
| सुनहु | सुनो | listen |
| मुनि | हे मुनि नारद | O sage Narada |
| जोगी | हे योगी | O yogi |
2 एहि बिधि हित तुम्हार मैं ठयऊ। कहि अस अंतरहित प्रभु भयऊ।।
English explanation
In this way I have resolved to act for your good. Having said this, the Lord disappeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | रीति से | in this manner |
| हित | भलाई | welfare |
| तुम्हार | तुम्हारी | your |
| मैं | मैंने | I |
| ठयऊ | निश्चय किया | have resolved |
| कहि | कहकर | having said |
| अस | ऐसा | this |
| अंतरहित | अंतर्धान | invisible; vanished |
| प्रभु | भगवान हरि | Lord Vishnu |
| भयऊ | हो गए | became |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.133
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 143
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 143, 143
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।