बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला। सत्यधाम प्रभु दीनदयाला।।
मूल पाठ
कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला। सत्यधाम प्रभु दीनदयाला।।
जदपि सतीं पूछा बहु भाँती। तदपि न कहेउ त्रिपुर आराती।।
स्रोत अभिलेख 1.57 · पुस्तक पृ. 77, 78
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे कृपालु! कहिये, आपने कौन-सी प्रतिज्ञा की है? हे प्रभो! आप सत्यके धाम और दीनदयालु हैं। यद्यपि सतीजीने बहुत प्रकारसे पूछा, परन्तु त्रिपुरारि शिवजीने कुछ न कहा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 78 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला। सत्यधाम प्रभु दीनदयाला।।
English explanation
‘O gracious Lord, abode of truth and compassionate to the afflicted, tell me: what vow have you made?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्ह | किया है | have made |
| कवन | कौन-सा | what |
| पन | प्रण | vow |
| कहहु | बताइए | please tell me |
| कृपाला | हे कृपालु | O gracious one |
| सत्यधाम | हे सत्य के धाम | O abode of truth |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| दीनदयाला | हे दीनों पर दया करने वाले | O compassionate one toward the afflicted |
2 जदपि सतीं पूछा बहु भाँती। तदपि न कहेउ त्रिपुर आराती।।
English explanation
Although Sati asked in many ways, Shiva, the foe of Tripura, still did not disclose his vow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जदपि | यद्यपि | although |
| सतीं | सती ने | Sati |
| पूछा | पूछा | asked |
| बहु | अनेक | many |
| भाँती | प्रकार से | in ways |
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| न | नहीं | not |
| कहेउ | बताया | disclosed |
| त्रिपुर | त्रिपुर, तीन असुर-नगरों के | of Tripura, the three demon cities |
| आराती | शत्रु अर्थात शिव ने | the foe, Shiva |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 78
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 77, 78
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।