बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
किंनर सिद्ध मनुज सुर नागा। हठि सबही के पंथहिं लागा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकिन्नर, सिद्ध, मनुष्य, देवता और नाग—सभीके पीछे वह हठपूर्वक पड़ गया (किसीको भी उसने शान्तिपूर्वक नहीं बैठने दिया)। ब्रह्माजीकी सृष्टिमें जहाँतक शरीरधारी स्त्री-पुरुष थे, सभी रावणके अधीन हो गये॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 183 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
किंनर सिद्ध मनुज सुर नागा। हठि सबही के पंथहिं लागा।।
ब्रह्मसृष्टि जहँ लगि तनुधारी। दसमुख बसबर्ती नर नारी।।
स्रोत अभिलेख 1.182 · पुस्तक पृ. 182, 183
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 किंनर सिद्ध मनुज सुर नागा। हठि सबही के पंथहिं लागा।।
English explanation
Celestial kinnara beings, perfected adepts, humans, gods, and serpent beings—he relentlessly pursued them all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| किंनर | किन्नर नामक दिव्य प्राणी | celestial kinnara beings |
| सिद्ध | सिद्धि प्राप्त साधक | perfected spiritual adepts |
| मनुज | मनुष्य | human beings |
| सुर | देवता | gods |
| नागा | नाग जाति के प्राणी | serpent beings |
| हठि | हठपूर्वक; बलपूर्वक | insistently; forcibly |
| सबही | सबके | of all |
| के | के | of |
| पंथहिं | मार्ग में; पीछे | on their trail |
| लागा | लग गया; पीछे पड़ गया | set upon; pursued |
2 ब्रह्मसृष्टि जहँ लगि तनुधारी। दसमुख बसबर्ती नर नारी।।
English explanation
All embodied males and females throughout Brahma’s creation were under Ravana’s control.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्मसृष्टि | ब्रह्मा की सृष्टि में | in Brahma’s creation |
| जहँ | जहाँ तक | as far as |
| लगि | तक | up to; throughout |
| तनुधारी | शरीरधारी जीव | embodied beings |
| दसमुख | दस मुखों वाले रावण के | of Ravana, the ten-headed one |
| बसबर्ती | वश में रहने वाले | subject to; under the control of |
| नर | नर; पुरुष | males; men |
| नारी | नारी; स्त्रियाँ | females; women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.182
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 183
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 182, 183
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।