बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आयसु करहिं सकल भयभीता। नवहिं आइ नित चरन बिनीता।।
मूल पाठ
आयसु करहिं सकल भयभीता। नवहिं आइ नित चरन बिनीता।।
स्रोत अभिलेख 1.182 · पुस्तक पृ. 182, 183
भावार्थ
मूल पाठ के बादडरके मारे सभी उसकी आज्ञाका पालन करते थे और नित्य आकर नम्रतापूर्वक उसके चरणोंमें सिर नवाते थे॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 183 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आयसु करहिं सकल भयभीता। नवहिं आइ नित चरन बिनीता।।
English explanation
All obeyed his commands in fear and came daily to bow humbly at his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयसु | आज्ञा का पालन | the carrying out of orders |
| करहिं | करते हैं | perform; carry out |
| सकल | सभी | all |
| भयभीता | डरे हुए | afraid; fear-stricken |
| नवहिं | झुकते हैं; प्रणाम करते हैं | bow |
| आइ | आकर | having come |
| नित | प्रतिदिन | daily |
| चरन | चरणों में | at his feet |
| बिनीता | विनम्र होकर | humbly; submissively |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.182
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 183
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 182, 183
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।