बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कासीं मरत जंतु अवलोकी। जासु नाम बल करउँ बिसोकी।।
मूल पाठ
कासीं मरत जंतु अवलोकी। जासु नाम बल करउँ बिसोकी।।
सोइ प्रभु मोर चराचर स्वामी। रघुबर सब उर अंतरजामी।।
स्रोत अभिलेख 1.119 · पुस्तक पृ. 131, 131
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[हे पार्वती!] जिनके नामके बलसे काशीमें मरते हुए प्राणीको देखकर मैं उसे [राममन्त्र देकर] शोकरहित कर देता हूँ (मुक्त कर देता हूँ), वही मेरे प्रभु रघुश्रेष्ठ श्रीरामचन्द्रजी जड़-चेतनके स्वामी और सबके हृदयके भीतरकी जाननेवाले हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 131 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कासीं मरत जंतु अवलोकी। जासु नाम बल करउँ बिसोकी।।
English explanation
Seeing creatures dying in Kashi, I free them from sorrow through the power of whose name.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कासीं | काशी में | in Kashi |
| मरत | मरते हुए | dying |
| जंतु | जीवों को | creatures |
| अवलोकी | देखकर | having seen |
| जासु | जिनके | whose |
| नाम | नाम के | of the name |
| बल | बल से | through the power |
| करउँ | मैं करता हूँ | I make |
| बिसोकी | शोकमुक्त | free from sorrow |
2 सोइ प्रभु मोर चराचर स्वामी। रघुबर सब उर अंतरजामी।।
English explanation
That very Lord is my master and the master of all that moves and is still; Rama, foremost of Raghu's line, knows every heart from within.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very one |
| प्रभु | प्रभु | Lord |
| मोर | मेरे | my |
| चराचर | चल और अचल समस्त जगत के | of all moving and unmoving existence |
| स्वामी | स्वामी | master |
| रघुबर | रघुवंश में श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu's line |
| सब | सबके | everyone's |
| उर | हृदय के | of the heart |
| अंतरजामी | भीतर की बात जानने वाले | knower of what lies within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 131
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 131, 131
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।