बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कालकेतु निसिचर तहँ आवा। जेहिं सूकर होइ नृपहि भुलावा।।
मूल पाठ
कालकेतु निसिचर तहँ आवा। जेहिं सूकर होइ नृपहि भुलावा।।
परम मित्र तापस नृप केरा। जानइ सो अति कपट घनेरा।।
स्रोत अभिलेख 1.17 · पुस्तक पृ. 172, 173
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[उसी समय] वहाँ कालकेतु राक्षस आया, जिसने सूअर बनकर राजाको भटकाया था। वह तपस्वी राजाका बड़ा मित्र था और खूब छल-प्रपञ्च जानता था॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 173 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कालकेतु निसिचर तहँ आवा। जेहिं सूकर होइ नृपहि भुलावा।।
English explanation
The demon Kalaketu arrived there—the one who had become a boar and led the king astray.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कालकेतु | कालकेतु नामक राक्षस | Kalaketu, the demon |
| निसिचर | राक्षस | demon |
| तहँ | वहाँ | there |
| आवा | आया | arrived |
| जेहिं | जिसने | who |
| सूकर | सूअर | a boar |
| होइ | बनकर | having become |
| नृपहि | राजा को | the king |
| भुलावा | भटका दिया था | had led astray |
2 परम मित्र तापस नृप केरा। जानइ सो अति कपट घनेरा।।
English explanation
He was a close friend of the king disguised as an ascetic and knew a great many devious tricks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत घनिष्ठ | very close |
| मित्र | मित्र | friend |
| तापस | तपस्वी बने | disguised as an ascetic |
| नृप | राजा | the king |
| केरा | का | of |
| जानइ | जानता था | knew |
| सो | वह कालकेतु | he, Kalaketu |
| अति | बहुत | very; greatly |
| कपट | छल-कपट | deceitful tricks |
| घनेरा | बहुत-से; गहरे | many; elaborate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 173
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 172, 173
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।