बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कानन्हि कनक फूल छबि देहीं। चितवत चितहि चोरि जनु लेहीं।।
मूल पाठ
कानन्हि कनक फूल छबि देहीं। चितवत चितहि चोरि जनु लेहीं।।
चितवनि चारु भृकुटि बर बाँकी। तिलक रेखा सोभा जनु चाँकी।।
स्रोत अभिलेख 1.219 · पुस्तक पृ. 216, 217
भावार्थ
मूल पाठ के बादकानोंमें सोनेके कर्णफूल [अत्यन्त] शोभा दे रहे हैं और देखते ही [देखनेवालेके] चित्तको मानो चुरा लेते हैं। उनकी चितवन (दृष्टि) बड़ी मनोहर है और भौंहें तिरछी एवं सुन्दर हैं। [माथेपर] तिलककी रेखाएँ ऐसी सुन्दर हैं मानो [मूॢतमती] शोभापर मुहर लगा दी गयी है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 217 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कानन्हि कनक फूल छबि देहीं। चितवत चितहि चोरि जनु लेहीं।।
English explanation
Golden flower-shaped ornaments lent beauty to their ears; with their glances, they seemed to steal onlookers’ hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कानन्हि | कानों में | in their ears |
| कनक | सोने के | golden |
| फूल | फूलाकार कर्णाभूषण | flower-shaped ear ornaments |
| छबि | शोभा | beauty |
| देहीं | देते हैं | lend |
| चितवत | देखते हुए | while glancing |
| चितहि | चित्त को | the heart |
| चोरि | चुराकर | stealing |
| जनु | मानो | as though |
| लेहीं | ले लेते हैं | take away |
2 चितवनि चारु भृकुटि बर बाँकी। तिलक रेखा सोभा जनु चाँकी।।
English explanation
Their glances were lovely and their eyebrows gracefully arched; the line of the forehead mark seemed an imprint of beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चितवनि | चितवन; देखने का ढंग | glance |
| चारु | सुंदर | lovely |
| भृकुटि | भौंहें | eyebrows |
| बर | सुंदर; श्रेष्ठ | fine; beautiful |
| बाँकी | सुघड़ वक्र | gracefully arched |
| तिलक | माथे के तिलक की | of the forehead mark |
| रेखा | रेखा | line |
| सोभा | सुंदरता की | of beauty |
| जनु | मानो | as though |
| चाँकी | छाप लगी हो | an imprint had been stamped |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.219
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 217
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 216, 217
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।