बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह सिव जदपि उचित अस नाहीं। नाथ बचन पुनि मेटि न जाहीं।।
मूल पाठ
कह सिव जदपि उचित अस नाहीं। नाथ बचन पुनि मेटि न जाहीं।।
सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरमु यह नाथ हमारा।।
स्रोत अभिलेख 1.77 · पुस्तक पृ. 93, 93
भावार्थ
मूल पाठ के बादशिवजीेने कहा—यद्यपि ऐसा उचित नहीं है, परन्तु स्वामीकी बात भी मेटी नहीं जा सकती। हे नाथ! मेरा यही परम धर्म है कि मैं आपकी आज्ञाको सिरपर रखकर उसका पालन करूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 93 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कह सिव जदपि उचित अस नाहीं। नाथ बचन पुनि मेटि न जाहीं।।
English explanation
Shiva said, “Although doing this is not proper, the Lord’s words cannot be set aside.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| सिव | शिव | Shiva |
| जदपि | यद्यपि | although |
| उचित | उचित | proper |
| अस | ऐसा | such; doing this |
| नाहीं | नहीं है | is not |
| नाथ | स्वामी के | the Lord’s |
| बचन | वचन | words |
| पुनि | फिर भी | nevertheless |
| मेटि | टाले | set aside |
| न | नहीं | not |
| जाहीं | जा सकते | can be |
2 सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरमु यह नाथ हमारा।।
English explanation
Lord, reverently accepting and carrying out your command is my highest duty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिर | सिर पर | on the head |
| धरि | धारण करके | having placed |
| आयसु | आज्ञा | command |
| करिअ | पालन करना | to carry out |
| तुम्हारा | आपकी | your |
| परम | सर्वोच्च | highest |
| धरमु | धर्म; कर्तव्य | duty |
| यह | यह | this |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| हमारा | हमारा | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.77
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 93
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका शिवजीसे विवाहके लिये अनुरोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 93, 93
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।