बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें।।
मूल पाठ
कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें।।
एहि के कंठ कुठारु न दीन्हा। तौ मैं काह कोपु करि कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 1.279 · पुस्तक पृ. 266, 267
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिने कहा—हे राम! क्रोध कैसे जाय; अब भी तेरा छोटा भाई टेढ़ा ही ताक रहा है। इसकी गर्दनपर मैंने कुठार न चलाया, तो क्रोध करके किया ही क्या?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 267 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें।।
English explanation
The sage said, ‘Rama, how can my anger subside? Your younger brother is still looking at me in an improper manner.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| मुनि | मुनि परशुराम | the sage Parashurama |
| राम | हे राम | O Rama |
| जाइ | दूर हो | subside |
| रिस | क्रोध | anger |
| कैसें | कैसे | how |
| अजहुँ | अभी भी | even now |
| अनुज | छोटा भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| तव | तुम्हारा | your |
| चितव | देखता है | looks |
| अनैसें | अनुचित ढंग से | in an improper manner |
2 एहि के कंठ कुठारु न दीन्हा। तौ मैं काह कोपु करि कीन्हा।।
English explanation
If I do not strike his neck with my axe, what was the point of my becoming angry?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इसका; इस लक्ष्मण का | this one's; Lakshmana's |
| के | के; पर | of; upon |
| कंठ | गला | neck |
| कुठारु | कुल्हाड़ा; परशु | axe |
| न | नहीं | not |
| दीन्हा | चलाया; मारा | struck with |
| तौ | तो | then |
| मैं | मैंने | I |
| काह | किसलिए | for what purpose |
| कोपु | क्रोध | anger |
| करि | करके | having done |
| कीन्हा | किया | did |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.279
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 267
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 266, 267
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