बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह नृप जे बिग्यान निधाना। तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना।।
मूल पाठ
कह नृप जे बिग्यान निधाना। तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना।।
सदा रहहि अपनपौ दुराएँ। सब बिधि कुसल कुबेष बनाएँ।।
स्रोत अभिलेख 1.161 · पुस्तक पृ. 165, 166
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने कहा—जो आपके सदृश विज्ञानके निधान और सर्वथा अभिमानरहित होते हैं, वे अपने स्वरूपको सदा छिपाये रहते हैं। क्योंकि कुवेष बनाकर रहनेमें ही सब तरहका कल्याण है (प्रकट संतवेषमें मान होनेकी सम्भावना है और मानसे पतनकी)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 165 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कह नृप जे बिग्यान निधाना। तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना।।
English explanation
AI draft: The king said, “Those who, like you, are repositories of profound knowledge have shed their pride.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| नृप | राजा | the king |
| जे | जो लोग | those who |
| बिग्यान | विशेष ज्ञान | profound knowledge |
| निधाना | भंडार | repositories |
| तुम्ह | तुम | you |
| सारिखे | जैसे | like |
| गलित | मिटा हुआ | dissolved |
| अभिमाना | अभिमान | pride |
2 सदा रहहि अपनपौ दुराएँ। सब बिधि कुसल कुबेष बनाएँ।।
English explanation
They always conceal their true identity; though accomplished in every way, they maintain an unassuming, unattractive appearance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सदा | सदा | always |
| रहहि | रहते हैं | remain |
| अपनपौ | अपनी वास्तविक पहचान | their true identity |
| दुराएँ | छिपाए हुए | concealed |
| सब | सभी | every |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| कुसल | कुशल | accomplished |
| कुबेष | अनाकर्षक वेश | unattractive attire |
| बनाएँ | बनाए हुए | maintaining |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.161
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 165
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 165, 166
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।