बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।
मूल पाठ
कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।
माता पितहि उरिन भए नीकें। गुर रिनु रहा सोचु बड़ जीकें।।
स्रोत अभिलेख 1.276 · पुस्तक पृ. 264, 265
भावार्थ
मूल पाठ के बादलक्ष्मणजीने कहा—हे मुनि! आपके शीलको कौन नहीं जानता? वह संसारभरमें प्रसिद्ध है। आप माता-पितासे तो अच्छी तरह उऋण हो ही गये, अब गुरुका ऋण रहा, जिसका जीमें बड़ा सोच लगा है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 264 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।
English explanation
AI draft: Lakshmana said, “Sage, who does not know your disposition? It is known throughout the world.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेउ | कहा | said |
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama’s brother |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| सीलु | स्वभाव; आचरण | disposition; conduct |
| तुम्हारा | आपका | your |
| को | कौन | who |
| नहि | नहीं | does not |
| जान | जानता | know |
| बिदित | प्रसिद्ध; ज्ञात | well known |
| संसारा | संसार में | throughout the world |
2 माता पितहि उरिन भए नीकें। गुर रिनु रहा सोचु बड़ जीकें।।
English explanation
You have thoroughly discharged your debt to your parents; only your debt to your teacher remains, a great concern in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| माता | माता का | to your mother |
| पितहि | पिता का भी | and to your father |
| उरिन | ऋण से मुक्त | free of debt |
| भए | हो गए | have become |
| नीकें | अच्छी तरह | thoroughly |
| गुर | गुरु का | to your teacher |
| रिनु | ऋण | debt |
| रहा | शेष रहा | remains |
| सोचु | चिंता | concern |
| बड़ | बड़ी | great |
| जीकें | मन में | in your heart |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.276
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 264
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 264, 265
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।