बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे रघुकुलके पताकास्वरूप श्रीरामचन्द्रजी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो। ऐसा कहकर परशुरामजी तपके लिये वनको चले गये। [यह देखकर] दुष्ट राजालोग बिना ही कारणके (मन:कल्पित) डरसे (रामचन्द्रजीसे तो परशुरामजी भी हार गये, हमने इनका अपमान किया था, अब कहीं ये उसका बदला न लें, इस व्यर्थके डरसे) डर गये, वे कायर चुपकेसे जहाँ-तहाँ भाग गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 272 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।।
अपभयँ कुटिल महीप डेराने। जहँ तहँ कायर गवँहिं पराने।।
स्रोत अभिलेख 1.285 · पुस्तक पृ. 271, 272
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।।
English explanation
Saying, ‘Glory, glory, glory to you, banner of Raghu’s lineage!’ Parashurama went to the forest to practise austerities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | having said |
| जय | जय हो | glory to you |
| जय | जय हो | glory to you |
| जय | जय हो | glory to you |
| रघुकुलकेतू | रघुकुल की ध्वजा, राम | Rama, banner of Raghu’s lineage |
| भृगुपति | भृगुवंशी परशुराम | Parashurama of Bhrigu’s lineage |
| गए | चले गए | went away |
| बनहि | वन में | to the forest |
| तप | तपस्या | austerities |
| हेतू | के लिए | for the purpose of |
2 अपभयँ कुटिल महीप डेराने। जहँ तहँ कायर गवँहिं पराने।।
English explanation
The crooked kings were frightened by their own fears; those cowards fled here and there into villages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अपभयँ | अपने ही भय से | from their own fear |
| कुटिल | कुटिल; कपटी | crooked; deceitful |
| महीप | राजा | kings |
| डेराने | डर गए | became frightened |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ; वहाँ | there |
| कायर | कायर लोग | cowards |
| गवँहिं | गाँवों में | into villages |
| पराने | भाग गए | fled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.285
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 272
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 271, 272
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।