बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करौं काह मुख एक प्रसंसा। जय महेस मन मानस हंसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमैं एक मुखसे आपकी क्या प्रशंसा करूँ? हे महादेवजीके मनरूपी मानसरोवरके हंस! आपकी जय हो। मैंने अनजानमें आपको बहुत-से अनुचित वचन कहे। हे क्षमाके मन्दिर दोनों भाई! मुझे क्षमा कीजिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 272 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
करौं काह मुख एक प्रसंसा। जय महेस मन मानस हंसा।।
अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमामंदिर दोउ भ्राता।।
स्रोत अभिलेख 1.285 · पुस्तक पृ. 271, 272
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करौं काह मुख एक प्रसंसा। जय महेस मन मानस हंसा।।
English explanation
How can I praise you with only one mouth? Glory to you, the swan in the lake of Shiva’s mind!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करौं | मैं करूँ | can I offer |
| काह | क्या; कितनी | what; how much |
| मुख | मुख से | with a mouth |
| एक | एक | one; a single |
| प्रसंसा | प्रशंसा | praise |
| जय | जय हो | glory to you |
| महेस | महादेव शिव के | of Shiva |
| मन | मनरूपी | in the form of the mind |
| मानस | मानस सरोवर | Manasa lake |
| हंसा | हंस | swan |
2 अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमामंदिर दोउ भ्राता।।
English explanation
In ignorance I said many improper things. Both brothers, abodes of forgiveness, please forgive me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुचित | अनुचित बातें | improper things |
| बहुत | बहुत | many; much |
| कहेउँ | मैंने कहा | I said |
| अग्याता | अज्ञानवश | through ignorance |
| छमहु | क्षमा करें | please forgive |
| छमामंदिर | क्षमा के धाम | abodes of forgiveness |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्राता | भाइयो; राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.285
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 272
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 271, 272
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।