बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहु नाथ सुंदर दोउ बालक। मुनिकुल तिलक कि नृपकुल पालक।।
मूल पाठ
कहहु नाथ सुंदर दोउ बालक। मुनिकुल तिलक कि नृपकुल पालक।।
ब्रह्म जो निगम नेति कहि गावा। उभय बेष धरि की सोइ आवा।।
स्रोत अभिलेख 1.216 · पुस्तक पृ. 214, 214
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! कहिये, ये दोनों सुन्दर बालक मुनिकुलके आभूषण हैं या किसी राजवंशके पालक? अथवा जिसका वेदोंने 'नेति कहकर गान किया है कहीं वह ब्रह्म तो युगलरूप धरकर नहीं आया है?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 214 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहहु नाथ सुंदर दोउ बालक। मुनिकुल तिलक कि नृपकुल पालक।।
English explanation
AI draft: Tell me, lord: are these two beautiful boys the glory of a lineage of sages or protectors of a royal lineage?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | बताइए | please tell |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| दोउ | दोनों | both |
| बालक | बालक | boys |
| मुनिकुल | मुनियों के कुल के | of a lineage of sages |
| तिलक | गौरव बढ़ाने वाले | crowning glory |
| कि | या | or |
| नृपकुल | राजाओं के कुल के | of a royal lineage |
| पालक | रक्षक | protectors |
2 ब्रह्म जो निगम नेति कहि गावा। उभय बेष धरि की सोइ आवा।।
English explanation
Has that very Brahman, whom the Vedas praise by saying ‘not this,’ come assuming these two forms?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्म | परम तत्त्व ब्रह्म | Brahman, the ultimate reality |
| जो | जिसका | whom |
| निगम | वेद | the Vedas |
| नेति | यह नहीं, यह नहीं | not this, not this |
| कहि | कहकर | saying |
| गावा | गान करते हैं | praise |
| उभय | दोनों के | of both |
| बेष | रूप | forms |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| की | क्या | has …? |
| सोइ | वही | that very one |
| आवा | आया है | has come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.216
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 214
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
- मुद्रित पृष्ठ
- 214, 214
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।