बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहु काहि यहु लाभु न भावा। काहुँ न संकर चाप चढ़ावा।।
मूल पाठ
कहहु काहि यहु लाभु न भावा। काहुँ न संकर चाप चढ़ावा।।
रहउ चढ़ाउब तोरब भाई। तिलु भरि भूमि न सके छड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 1.252 · पुस्तक पृ. 245, 245
भावार्थ
मूल पाठ के बादकहिये, यह लाभ किसको अच्छा नहीं लगता। परन्तु किसीने भी शङ्करजीका धनुष नहीं चढ़ाया। अरे भाई! चढ़ाना और तोडऩा तो दूर रहा, कोई तिलभर भूमि भी छुड़ा न सका॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 245 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहहु काहि यहु लाभु न भावा। काहुँ न संकर चाप चढ़ावा।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Tell me, who did not desire this prize? Yet no one strung Shiva’s bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | कहिए | tell me |
| काहि | किसे | to whom |
| यहु | यह | this |
| लाभु | लाभ; सीता से विवाह का अवसर | prize; the opportunity to marry Sita |
| न | नहीं | not |
| भावा | अच्छा लगा | was pleasing |
| काहुँ | किसी ने | anyone |
| न | नहीं | not |
| संकर | शंकर अर्थात शिव का | of Shiva |
| चाप | धनुष | bow |
| चढ़ावा | प्रत्यंचा चढ़ाई | strung |
2 रहउ चढ़ाउब तोरब भाई। तिलु भरि भूमि न सके छड़ाई।।
English explanation
Brothers, leave aside stringing or breaking it; no one could lift it even a fraction off the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहउ | रहने दीजिए; दूर रहा | leave aside |
| चढ़ाउब | प्रत्यंचा चढ़ाना | stringing the bow |
| तोरब | तोड़ना | breaking it |
| भाई | भाइयो | brothers |
| तिलु | तिल जितना अति छोटा परिमाण | a sesame seed’s tiny measure |
| भरि | भर; जितना | as much as |
| भूमि | धरती से | from the ground |
| न | नहीं | not |
| सके | सक्षम हुए | were able |
| छड़ाई | छुड़ाकर उठाना | to lift clear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.252
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 245
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 245, 245
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।